CG News: छत्तीसगढ़ में रोहिदास जाति प्रमाण पत्र पर बड़ा आदेश, चमार या मोची दर्ज होने पर भी बन सकेगा प्रमाण पत्र
CG News: छत्तीसगढ़ सरकार ने अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़े जाति प्रमाण पत्र के मामले में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं. सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के मुताबिक, यदि किसी आवेदक के पूर्वजों के पुराने राजस्व अभिलेखों में ‘चमार’ या ‘मोची’ दर्ज है, तो निर्धारित जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ‘रोहिदास’ जाति का प्रमाण पत्र जारी किया जा सकेगा.

पुराने रिकॉर्ड में नाम अलग होने से आ रही थी दिक्कत
सरकार के सामने यह मामला आया था कि कुछ क्षेत्रों में रोहिदास जाति से संबंधित लोगों के पुराने राजस्व रिकॉर्ड में ‘चमार’ या ‘मोची’ दर्ज है. इसके कारण वर्तमान में रोहिदास जाति का प्रमाण पत्र बनवाने में दिक्कतें आ रही थीं. आदेश में इसी तरह के दस्तावेजी अंतर को लेकर प्रक्रिया स्पष्ट की गई है.
जांच के बाद जारी होगा प्रमाण पत्र
नए निर्देश के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति रोहिदास जाति का प्रमाण पत्र लेने के लिए आवेदन करता है और उसके पूर्वजों के राजस्व रिकॉर्ड में चमार या मोची दर्ज है, तो सक्षम अधिकारी मामले की विधिवत जांच करेंगे. जांच के दौरान 1 अगस्त 1996 के सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र के परिशिष्ट में निर्धारित बिंदुओं के आधार पर दस्तावेजों का परीक्षण किया जाएगा. यदि जांच में आवेदक का रोहिदास जाति से संबंध प्रमाणित होता है, तो प्रमाण पत्र जारी किया जा सकेगा.
सभी संबंधित अधिकारियों को दिए निर्देश
सरकार ने आदेश की प्रतियां संबंधित विभागों, राजस्व मंडल बिलासपुर, संभागीय आयुक्तों, विभागाध्यक्षों और जिला कलेक्टरों को भेजी हैं. सभी संबंधित अधिकारियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है. छत्तीसगढ़ सरकार के नागरिक सेवा पोर्टल पर भी जाति प्रमाण पत्र सेवा उपलब्ध है.
दस्तावेजों की जांच के आधार पर मिलेगा लाभ
इस आदेश का मुख्य उद्देश्य पुराने राजस्व अभिलेखों में जाति के नाम में अंतर के कारण सामने आने वाली प्रमाण पत्र संबंधी कठिनाइयों के लिए स्पष्ट प्रक्रिया उपलब्ध कराना है. हालांकि, केवल पुराने रिकॉर्ड में ‘चमार’ या ‘मोची’ दर्ज होना अपने आप रोहिदास प्रमाण पत्र की गारंटी नहीं है, बल्कि सक्षम अधिकारी द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा.


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