CG News: बस्तर का इंद्रावती टाइगर रिजर्व 40 साल बाद पर्यटकों के लिए खुलेगा, सफारी रूट और वाहनों की तैयारी शुरू
CG News: बस्तर के घने जंगलों और समृद्ध वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध इंद्रावती टाइगर रिजर्व में करीब चार दशक बाद संगठित वन्यजीव पर्यटन शुरू करने की तैयारी चल रही है. वन विभाग प्रस्तावित योजना के तहत 1 नवंबर 2026 से रिजर्व को पर्यटकों के लिए खोलने की दिशा में काम कर रहा है. शुरुआती चरण में चुनिंदा क्षेत्रों को पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जाएगा. यहां सफारी सहित अन्य गतिविधियां शुरू करने की योजना है. लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद की चुनौती के कारण रिजर्व का बड़ा हिस्सा पर्यटकों और वन विभाग की नियमित पहुंच से दूर रहा था.

2,799 वर्ग किलोमीटर में फैला रिजर्व
बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल करीब 2,799.07 वर्ग किलोमीटर है. इसमें 1,258.37 वर्ग किलोमीटर कोर क्षेत्र और 1,540.70 वर्ग किलोमीटर बफर क्षेत्र शामिल है. वर्ष 1983 में इसे प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत शामिल किया गया था. घने जंगल, नदी-नाले और विविध प्राकृतिक आवास इस रिजर्व की प्रमुख विशेषताएं हैं. सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों के कारण यहां लंबे समय तक नियमित पर्यटन विकसित नहीं हो पाया. अब परिस्थितियों में बदलाव के साथ वन विभाग पर्यटन सुविधाएं तैयार करने पर जोर दे रहा है.
सफारी वाहनों और रूट की तैयारी
पर्यटन शुरू करने से पहले रिजर्व में जरूरी बुनियादी व्यवस्थाएं तैयार की जा रही हैं. प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण पांडे के मुताबिक 1 नवंबर से पर्यटन शुरू करने की दिशा में तैयारियां जारी हैं. सफारी के लिए वाहनों की व्यवस्था करने के साथ संभावित रूट भी तैयार किए जा रहे हैं. शुरुआती चरण में दो से तीन प्रमुख पर्यटन स्थलों को विकसित करने की योजना है. इन क्षेत्रों तक पहुंच, सफारी मार्ग, पर्यटकों की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पूरा प्लान तैयार किया जा रहा है.
बाघ और वनभैंसे समेत कई वन्यजीव
इंद्रावती टाइगर रिजर्व जैव विविधता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है. यहां बाघ, वनभैंसा, तेंदुआ, स्लॉथ भालू, गौर, चीतल, जंगली सूअर और नीलगाय जैसे वन्यजीव पाए जाते हैं. रिजर्व में विभिन्न प्रजातियों के पक्षी और दूसरे वन्यजीव भी मौजूद हैं. हाल के वर्षों में यहां स्मूथ-कोटेड ऊदबिलाव देखे जाने की जानकारी भी सामने आई है. वन विभाग के आंतरिक आंकड़ों के अनुसार फरवरी-मार्च 2025 में रिजर्व में करीब 14 से 17 वनभैंसों की मौजूदगी दर्ज की गई थी.
सीमित प्रवेश और स्थानीय रोजगार पर जोर
पर्यटन शुरू करने के साथ वन्यजीवों और जंगल पर अतिरिक्त दबाव न पड़े, इसके लिए पर्यटकों और सफारी वाहनों की संख्या सीमित रखने पर विचार किया जा रहा है. रिजर्व की कैरिंग कैपेसिटी का आकलन किया जा रहा है और सभी क्षेत्रों को पर्यटकों के लिए खोलने की योजना नहीं है. पर्यटन से स्थानीय युवाओं को गाइड, ड्राइवर और हॉस्पिटैलिटी जैसी सेवाओं में रोजगार देने के साथ होमस्टे और आदिवासी उत्पादों को बढ़ावा देने पर भी काम किया जा रहा है. विभाग का उद्देश्य संरक्षण, नियंत्रित पर्यटन और स्थानीय समुदाय की भागीदारी के बीच संतुलन बनाना है.


One Response