CG News: छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की नई तस्वीर, 8 लाख लखपति दीदियों से ड्रोन दीदियों तक बढ़ा आत्मनिर्भरता का दायरा
CG News: छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण अब केवल आर्थिक मदद देने तक सीमित नहीं है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक संबल के साथ तकनीक, कृषि, स्वरोजगार, उद्यमिता और बाजार से जोड़ने पर जोर दे रही है. महिला-नेतृत्व विकास के विजन के तहत महिलाओं को पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़कर नए अवसरों से जोड़ने की कोशिश हो रही है. दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत लखपति दीदी पहल इसका बड़ा उदाहरण है. प्रदेश में अब तक करीब 8 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं. कृषि, पशुपालन, लघु उद्योग और स्वरोजगार जैसी गतिविधियों से अपनी आय बढ़ाने वाली इन महिलाओं की संख्या अब 10 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. खासतौर पर ग्रामीण, आदिवासी और कमजोर जनजातीय क्षेत्रों की महिलाओं को स्थायी आय के साधनों से जोड़ने पर फोकस किया जा रहा है.

हुनर को बाजार और रोजगार से जोड़ने की पहल
महिलाओं को स्थानीय हुनर के जरिए कमाई का अवसर देने के लिए भी कई प्रयास किए जा रहे हैं. कोंडागांव में आरसेटी के माध्यम से महिलाओं को स्थानीय और प्राकृतिक संसाधनों से बाजार योग्य राखियां बनाने का प्रशिक्षण दिया गया. इसके बाद बिहान समूह की महिलाओं ने जिला कार्यालय परिसर में स्टॉल लगाकर अपने हस्तनिर्मित उत्पाद बेचे, जिन्हें लोगों का अच्छा प्रतिसाद मिला. वहीं जशपुर की दुलदुला विकासखंड निवासी संगीता देवी ने बिहान स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद मुख्यमंत्री जशपुर एक्सप्रेस योजना के तहत 2025 में ई-रिक्शा प्राप्त किया. अब वह खुद ई-रिक्शा चलाकर रोज करीब 700 से 800 रुपये तक कमाती हैं और खर्च के बाद उनकी मासिक शुद्ध आय करीब 15 से 18 हजार रुपये तक पहुंच रही है. महिलाओं को छोटे कारोबार से जोड़ने के लिए महतारी शक्ति ऋण योजना के तहत पात्र महिलाओं को छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक से बिना गारंटी 25 हजार रुपये तक ऋण देने की व्यवस्था भी की गई है.

ड्रोन दीदी बनकर खेतों में पहुंचा रहीं तकनीक
महिला सशक्तिकरण को आधुनिक कृषि से जोड़ने में नमो ड्रोन दीदी योजना अहम भूमिका निभा रही है. स्व-सहायता समूहों की चयनित महिलाओं को ड्रोन संचालन, रिमोट पायलटिंग, रखरखाव और कृषि कार्यों में इसके इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. प्रशिक्षित महिलाएं खेतों में नैनो यूरिया, तरल उर्वरकों और कीटनाशकों का छिड़काव कर किसानों को आधुनिक कृषि सेवा उपलब्ध करा रही हैं. जशपुर की चयनित महिलाएं रायपुर में विशेष प्रशिक्षण लेकर ड्रोन के सुरक्षित संचालन और कृषि उपयोग की जानकारी हासिल कर रही हैं, जिसके बाद वे जिले के किसानों को यह सुविधा देंगी. रायपुर जिले के आरंग विकासखंड की चंद्रकली वर्मा इसकी सफल मिसाल हैं. नवंबर 2023 में योजना से जुड़ने के बाद उन्होंने ड्रोन प्रशिक्षण लिया और अब करीब 40 किलोमीटर के दायरे में 70 गांवों के किसानों को सेवा दे रही हैं. करीब 300 रुपये प्रति एकड़ की दर से छिड़काव कर वह एक सीजन में लगभग 1.5 लाख रुपये तक कमाती हैं और अपने काम के विस्तार के लिए तीन लोगों को रोजगार भी दे चुकी हैं.
बाजार, कारोबार और सुरक्षा पर भी जोर
महिलाओं को केवल उत्पाद बनाने तक सीमित रखने के बजाय उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने पर भी सरकार का ध्यान है. महतारी बाजार और विभिन्न मेलों के जरिए महिला स्व-सहायता समूहों के हस्तशिल्प, ऑर्गेनिक और स्थानीय उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा दिया जा रहा है. इससे महिलाओं को ब्रांडिंग, बिक्री और बाजार तक सीधी पहुंच का अवसर मिल रहा है. वहीं महिला सशक्तिकरण के व्यापक प्रयासों के तहत छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2026-27 को महतारी गौरव वर्ष घोषित किया है. इसमें महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी जा रही है. आंगनवाड़ी, पोषण कार्यक्रम, महतारी सदन और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के साथ वन स्टॉप सेंटर, 181 महिला हेल्पलाइन और डायल-112 जैसी व्यवस्थाओं पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि जरूरत के समय महिलाओं को त्वरित सहायता और सुरक्षा मिल सके.

लखपति दीदी से रोजगार देने वाली ड्रोन दीदी तक
छत्तीसगढ़ में महिलाओं की भूमिका अब आर्थिक सहायता पाने वाली लाभार्थी तक सीमित नहीं रह गई है. लखपति दीदी बनकर महिलाएं परिवार की आय बढ़ा रही हैं, तो ड्रोन दीदी के रूप में आधुनिक कृषि तकनीक को गांवों और खेतों तक पहुंचा रही हैं. स्थानीय उत्पादों की बिक्री, छोटे कारोबार, ई-रिक्शा संचालन और तकनीकी सेवाओं के जरिए महिलाएं अपनी स्वतंत्र आय के साथ रोजगार के अवसर भी पैदा कर रही हैं. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार की योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर, कुशल और तकनीक-सक्षम बनाना है. छत्तीसगढ़ की महिलाओं की यह बदलती भूमिका बताती है कि महिला सशक्तिकरण अब सिर्फ परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने तक सीमित नहीं, बल्कि उन्हें विकास की नेतृत्वकर्ता बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. सशक्त महिला के साथ सशक्त परिवार, सशक्त समाज और सशक्त छत्तीसगढ़ की परिकल्पना इसी बदलाव को मजबूती दे रही है.
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