CG News: भावना बोहरा की 151 KM कांवड़ पदयात्रा का भव्य समापन, मां नर्मदा के जल से भोरमदेव का अभिषेक
CG News: पंडरिया विधायक भावना बोहरा के नेतृत्व में अमरकंटक से भोरमदेव तक निकली 151 किलोमीटर लंबी कांवड़ पदयात्रा रविवार को भगवान भोरमदेव के जलाभिषेक के साथ पूरी हुई. 10 अगस्त को मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक से शुरू हुई इस यात्रा में विधायक के साथ करीब 600 कांवड़ यात्री शामिल हुए. अंतिम पड़ाव पर मां नर्मदा का पवित्र जल भगवान भोरमदेव को अर्पित कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की गई.

जयघोष से गूंज उठा भोरमदेव
भोरमदेव पहुंचते ही पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव, बोल बम और भारत माता की जय के जयघोष से गूंज उठा. हजारों श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने पुष्पवर्षा कर कांवड़ यात्रियों का स्वागत किया. यात्रा के अंतिम चरण में विधायक भावना बोहरा और कांवड़ियों ने बोड़ला से भोरमदेव के लिए प्रस्थान किया. सुकवापारा, जैताटोला रोड, खैरबना खुर्द, घोंघा और चौरा होते हुए यात्रा मंदिर परिसर पहुंची.

बारिश और कठिन रास्तों के बीच नहीं रुके कदम
कांवड़ यात्रियों ने पूरी यात्रा के दौरान वनांचल के कठिन रास्तों, पहाड़ी इलाकों, नदियों और तेज बारिश जैसी चुनौतियों का सामना किया. कई यात्रियों के पैरों में छाले पड़े और उन्हें थकान भी हुई, लेकिन आस्था और संकल्प के आगे किसी ने कदम पीछे नहीं खींचे. पैरों में माहुर रंग, हाथ में तिरंगा और कंधे पर कांवड़ लिए श्रद्धालु लगातार भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे.
आस्था के साथ राष्ट्रभक्ति का संदेश
विधायक भावना बोहरा ने कहा कि यह यात्रा सिर्फ 151 किलोमीटर की पदयात्रा नहीं थी, बल्कि मां नर्मदा और भगवान भोलेनाथ के प्रति आस्था, सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण और राष्ट्र के प्रति गौरव का आध्यात्मिक संकल्प थी. उन्होंने कहा कि कांवड़ में मां नर्मदा का जल लेकर भोरमदेव पहुंचना उनके लिए बेहद भावुक और यादगार क्षण रहा. यात्रा में तिरंगे और भगवा ध्वज के माध्यम से राष्ट्रभक्ति और सनातन संस्कृति का संदेश भी दिया गया.

भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण की प्रसादी
भोरमदेव मंदिर में जलाभिषेक के बाद विधायक भावना बोहरा की ओर से कांवड़ यात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए भंडारे एवं प्रसादी की व्यवस्था की गई. इसमें हजारों लोगों ने प्रसादी ग्रहण की. 15 अगस्त को विधायक और कांवड़ यात्रियों ने ग्राम डोंगरिया के शासकीय विद्यालय में ध्वजारोहण किया था. इसके बाद बोड़ला तक यात्रा पूरी की गई और अंतिम दिन भोरमदेव पहुंचकर जलाभिषेक किया गया. यात्रा के समापन पर छत्तीसगढ़ और कबीरधाम की सुख-शांति एवं जनकल्याण की प्रार्थना की गई.
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