CG News: सावन में जरूर जाएं छत्तीसगढ़ के ये 8 शिवधाम! महादेव की आस्था और हजारों साल पुराने मंदिरों की कहानी
CG News: सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है. इस दौरान छत्तीसगढ़ के प्राचीन शिव मंदिरों में हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इन मंदिरों का इतिहास, धार्मिक महत्व और अद्भुत वास्तुकला इन्हें खास बनाती है. आइए जानते हैं छत्तीसगढ़ के 8 प्रमुख शिवधामों की कहानी, उनकी खासियत और धार्मिक महत्व.
मधेश्वर महादेव धाम, प्राकृतिक शिवलिंग का अद्भुत धाम
जशपुर जिले की मयाली पहाड़ी पर स्थित मधेश्वर महादेव धाम प्राकृतिक शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है. मान्यता है कि यह स्थान वर्षों से साधु संतों की तपोभूमि रहा है. यहां श्रद्धालुओं के लिए सड़क, सीढ़ियां, प्रकाश व्यवस्था और अन्य सुविधाओं का विकास किया गया है. आज यह छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल हो चुका है.
भोरमदेव मंदिर, छत्तीसगढ़ का खजुराहो
कबीरधाम जिले में स्थित भोरमदेव मंदिर अपनी शानदार वास्तुकला और पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है. इसका निर्माण 11वीं शताब्दी में नागवंशी शासक रामचंद्र देव के शासनकाल में कराया गया था. मंदिर की कलात्मक मूर्तियां और ऐतिहासिक महत्व के कारण इसे छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहा जाता है.
हटकेश्वर महादेव मंदिर, रायपुर की प्राचीन धार्मिक पहचान
खारून नदी के किनारे स्थित हटकेश्वर महादेव मंदिर रायपुर की सबसे पुरानी धार्मिक धरोहरों में से एक है. इतिहास के अनुसार इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1402 ईस्वी में कलचुरी शासनकाल के दौरान कराया गया था. सावन सोमवार और महाशिवरात्रि पर यहां विशेष पूजा और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं.
कुलेश्वर महादेव मंदिर, राजिम का पवित्र शिवधाम
महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के त्रिवेणी संगम पर स्थित कुलेश्वर महादेव मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुराना माना जाता है. राजिम को छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा जाता है और कुलेश्वर महादेव यहां के प्रमुख आराध्य देव माने जाते हैं. राजिम कुंभ की धार्मिक परंपरा में भी इस मंदिर का विशेष महत्व है.
लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर, हजारों साल पुरानी आस्था
जांजगीर चांपा जिले में स्थित लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर छत्तीसगढ़ के सबसे पुराने शिव मंदिरों में शामिल है. इसका निर्माण 6वीं से 7वीं शताब्दी के बीच माना जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम के भाई लक्ष्मण ने यहां भगवान शिव की आराधना की थी, जिसके कारण इस मंदिर का नाम लक्ष्मणेश्वर पड़ा.
भूतेश्वर महादेव, प्राकृतिक शिवलिंग का चमत्कार
गरियाबंद जिले के मरौदा गांव में स्थित भूतेश्वर महादेव किसी राजा द्वारा बनवाया गया मंदिर नहीं है. यहां प्राकृतिक रूप से विशाल शिवलिंग मौजूद है, जिसे स्वयंभू माना जाता है. स्थानीय मान्यता है कि यह शिवलिंग समय के साथ बढ़ता जा रहा है, जिसके कारण यह श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है.
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जलेश्वर महादेव मंदिर, बस्तर की प्राचीन धरोहर
बारसूर क्षेत्र में स्थित जलेश्वर महादेव मंदिर प्राचीन शैव परंपरा और स्थापत्य कला का शानदार उदाहरण है. बारसूर कभी चिंदक नागवंशी राजाओं की राजधानी हुआ करता था. 10वीं से 12वीं शताब्दी के बीच यहां कई भव्य मंदिरों का निर्माण कराया गया था.
जलेश्वर धाम, प्राकृतिक जलकुंड वाला शिव मंदिर
जलेश्वर धाम का इतिहास करीब 800 से 900 वर्ष पुराना माना जाता है. इतिहासकार इसे कलचुरी शासनकाल से जोड़ते हैं. मंदिर परिसर में स्थित प्राकृतिक जलकुंड इसकी सबसे बड़ी विशेषता है. स्थानीय मान्यता के अनुसार इस जलकुंड का जल कभी पूरी तरह सूखता नहीं है.
सावन में करें इन शिवधामों के दर्शन
छत्तीसगढ़ के ये प्राचीन शिव मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की संस्कृति, इतिहास और आस्था की पहचान भी हैं. सावन के महीने में इन शिवधामों की यात्रा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव के साथ प्राचीन विरासत से जुड़ने का अवसर देती है.



