CG News: छत्तीसगढ़ कॉमन्स सम्मेलन का समापन, मंत्री रामविचार नेताम ने जनजातीय संस्कृति और प्रकृति संरक्षण पर दिया जोर
CG News: रायपुर के नवा रायपुर स्थित जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय संवाद सम्मेलन ‘छत्तीसगढ़ कॉमन्स क्विनिंग’ का समापन हुआ। इस अवसर पर आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम ने जनजातीय समुदाय की प्रकृति संरक्षण में भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

जनजातीय संस्कृति और प्रकृति से जुड़ाव
मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि देशभर में 10 करोड़ से अधिक जनजातीय लोग निवास करते हैं, जिनकी जल, जंगल, जमीन और पहाड़ों से गहरी आस्था जुड़ी हुई है, उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय पेड़-पौधों और प्राकृतिक संसाधनों में देवी-देवताओं का वास मानते हैं, जिसके कारण वे प्रकृति के सबसे बड़े संरक्षक हैं।
नीति निर्माण के लिए टास्क फोर्स का गठन
मंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार जनजातीय समस्याओं और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के लिए एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स गठित करने जा रही है, इस टास्क फोर्स की अध्यक्षता मुख्यमंत्री करेंगे और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल कर एक विशेष कार्यान्वयन समिति भी बनाई जाएगी।

PESA और वनाधिकार कानून पर फोकस
मंत्री ने कहा कि पेसा (PESA) और वनाधिकार अधिनियम (FRA) के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं, विशेषकर सीमांकन जैसी चुनौतियों को प्राथमिकता से हल किया जाएगा, उन्होंने कहा कि समुदाय केवल संसाधनों के उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि उनके संरक्षक भी हैं।
कॉमन्स संसाधनों का महत्व
प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने कहा कि जनजातीय समाज का प्रकृति से गहरा संबंध है और उनकी संस्कृति जल, जंगल और जमीन से जुड़ी हुई है, उन्होंने बताया कि कॉमन्स यानी साझा संसाधन केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर भी हैं।
जल संरक्षण पर विशेष जोर
मनरेगा आयुक्त ने कहा कि जल संरक्षण जनजातीय परंपरा का हिस्सा है और मनरेगा के माध्यम से इसे और मजबूत किया जा रहा है, वहीं रायपुर कलेक्टर ने कहा कि जल संरक्षण कोई तकनीकी जटिलता नहीं बल्कि सामुदायिक अनुभवों पर आधारित ज्ञान है।
सम्मेलन में बड़े विचार और सुझाव
सम्मेलन में यह बात सामने आई कि छत्तीसगढ़ की लगभग 70 लाख एकड़ कॉमन्स भूमि ग्रामीण जीवन की रीढ़ है, इसमें देशभर से 300 से अधिक विशेषज्ञ, शोधकर्ता और ग्राम प्रमुख शामिल हुए और सामुदायिक शासन पर चर्चा की गई।
सांस्कृतिक संरक्षण की पहल
सम्मेलन में जनजातीय लोकगीतों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के संरक्षण के लिए एक विशेष स्टूडियो स्थापित करने की योजना भी साझा की गई, यह सम्मेलन न केवल नीति निर्माण का मंच बना, बल्कि जनजातीय संस्कृति, प्रकृति संरक्षण और सामुदायिक संसाधन प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, सरकार का लक्ष्य है कि जनजातीय समाज को अधिकारों के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण में भी मजबूत भागीदार बनाया जाए।

