CG News: कड़ी मेहनत और संघर्ष से रजत तक, असम की पहलवान देबी डायमारी की कहानी
CG News: असम की महिला पहलवान देबी डायमारी ने कठिन परिस्थितियों और आर्थिक तंगी के बावजूद कुश्ती में अपना नाम बनाया। केवल सात साल की उम्र में अपने माता-पिता को खोने के बाद, देबी को अपने चाचा-चाची के साथ रहना पड़ा।

काम और खेल का संतुलन
2022 में देबी ने बोकाखात खेलो इंडिया सेंटर में कुश्ती शुरू की। प्रैक्टिस के लिए रूम किराए पर लेने हेतु उन्हें पार्ट-टाइम जॉब करनी पड़ी।
• ईजी बाजार स्टोर: 2,500 रुपये/माह
• बोन विला रिसॉर्ट: 7,000 रुपये/माह (स्वीमिंग पूल देखभाल)
सारा दिन काम करने के बाद वह केवल दो घंटे कुश्ती का अभ्यास कर पाती थीं।
कोच अनुस्तूप नाराह का मार्गदर्शन
असम टीम के कोच अनुस्तूप नाराह ने देबी को कुश्ती में मार्गदर्शन दिया और उन्हें सेंटर के पास रहने और प्रैक्टिस करने की सुविधा उपलब्ध करवाई। देबी ने साइकिल से जॉब करना शुरू किया और नियमित प्रैक्टिस के साथ अपने कौशल को निखारा।
शुरुआती सफलता और पदक
• 2022: सीनियर चैंपियनशिप (विशाखापत्तनम) क्वालीफाई
• 2024: स्टेट चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
इसके बाद देबी ने 2026 में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में महिलाओं की 62 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता।
परिवार का सहयोग और भविष्य के लक्ष्य
देबी की हाल ही में शादी हुई और उनके पति बेंगलुरु में नौकरी करते हैं। उनका समर्थन और ससुराल का सहयोग देबी को लगातार प्रेरित करता है। उनका अगला लक्ष्य सीनियर लेवल और इंटरनेशनल लेवल पर पदक जीतना है, देबी डायमारी की कहानी यह दिखाती है कि कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और सही मार्गदर्शन से हर बाधा को पार किया जा सकता है।


