CG News: खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026: जगदलपुर में आज से एथलेटिक्स स्पर्धाएं शुरू
CG News: खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 अब अपने सबसे रोमांचक चरण में प्रवेश कर चुका है। जगदलपुर में आज से एथलेटिक्स स्पर्धाओं की शुरुआत होने जा रही है, जहां देशभर के 443 खिलाड़ी 102 पदकों के लिए जोर आजमाइश करेंगे, छत्तीसगढ़ के बस्तर में सोमवार से खेलों का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के तहत अब सभी की नजरें जगदलपुर के धरमपुरा स्थित क्रीड़ा परिसर पर टिकी हैं, जहां एथलेटिक्स स्पर्धाएं आयोजित होंगी।

‘मोर वीर’ बना आकर्षण का केंद्र
इस आयोजन का शुभंकर ‘मोर वीर’ जनजातीय युवाओं के साहस, ऊर्जा और जज्बे का प्रतीक है। यह शुभंकर पूरे आयोजन में खिलाड़ियों और दर्शकों के बीच खास आकर्षण बना हुआ है, इस महाकुंभ में देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 443 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। सभी खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखाने और पदक जीतने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
17 स्पर्धाओं में होगा मुकाबला
एथलेटिक्स में कुल 17 इवेंट्स शामिल हैं, जिनमें 100 मीटर स्प्रिंट से लेकर 10,000 मीटर दौड़, हर्डल्स, रिले रेस, लंबी और ऊंची कूद जैसे मुकाबले शामिल हैं। यह प्रतियोगिताएं दर्शकों के लिए बेहद रोमांचक होने वाली हैं।
पहले दिन ही होंगे बड़े मुकाबले
पहले दिन डिस्कस थ्रो, लॉन्ग जंप और 110 मीटर हर्डल्स के फाइनल मुकाबले होंगे। इसके साथ ही शाम को 400 मीटर और रिले रेस में विजेताओं को पदक दिए जाएंगे, पूरे आयोजन के दौरान कुल 102 पदकों के लिए मुकाबला होगा। इसमें छत्तीसगढ़ के 33 खिलाड़ी भी शामिल हैं, जो अपने राज्य का नाम रोशन करने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगे।
खिलाड़ियों के लिए शानदार व्यवस्थाएं
खिलाड़ियों की सुविधा के लिए प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। 13 प्रमुख होटलों में ठहरने की व्यवस्था की गई है और आवागमन के लिए एसी वाहन उपलब्ध कराए गए हैं, आयोजन स्थल पर सुरक्षा, चिकित्सा और अग्निशमन की पूरी व्यवस्था की गई है, ताकि खिलाड़ी बिना किसी चिंता के अपने प्रदर्शन पर ध्यान दे सकें।
बस्तर बनेगा नया स्पोर्ट्स हब
पर्यटन विभाग द्वारा खिलाड़ियों और अधिकारियों को बस्तर के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण भी कराया जाएगा, जिससे वे यहां की संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता को करीब से जान सकें, भारतीय खेल प्राधिकरण के मार्गदर्शन में आयोजित यह प्रतियोगिता न सिर्फ जनजातीय खिलाड़ियों को मंच देगी, बल्कि बस्तर को एक उभरते हुए खेल गंतव्य के रूप में भी स्थापित करेगी।

