CG News: नक्सलवाद अंत की ओर: बस्तर का 96% क्षेत्र मुक्त, 30 मार्च को लोकसभा में होगी अहम चर्चा
CG News: पिछले 50 वर्षों से बस्तर के सामाजिक और विकासात्मक ढांचे को प्रभावित करने वाला नक्सलवाद अब समाप्ति की कगार पर है। इस हिंसक विचारधारा ने हजारों जिंदगियां लीं और क्षेत्र के विकास को बाधित किया।
96% क्षेत्र हुआ नक्सल मुक्त
मजबूत रणनीति और राजनीतिक इच्छाशक्ति के चलते बस्तर का करीब 96 प्रतिशत इलाका अब नक्सली प्रभाव से मुक्त हो चुका है, जो एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
नक्सलबाड़ी से बस्तर तक की कहानी
1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी से शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे बस्तर के जंगलों तक पहुंचा और दशकों तक हिंसा और भय का कारण बना रहा, गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर ओलंपिक 2024 के दौरान 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य तय किया था, जो अब साकार होता नजर आ रहा है।
दो वर्षों में बड़ा बदलाव
पिछले दो वर्षों में करीब 3000 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, 2000 गिरफ्तार हुए और 500 से अधिक नक्सली मारे गए। कुल मिलाकर 5000 से ज्यादा नक्सली नेटवर्क से बाहर हो चुके हैं।
जवानों की शहादत और चुनौतियां
1987 से 2026 तक 1416 जवान शहीद हुए हैं। IED ब्लास्ट अब भी सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं, जिनसे निपटने के प्रयास जारी हैं, सरकार अब बस्तर के गांवों को ODF की तरह IED मुक्त बनाने की दिशा में काम कर रही है, ताकि पूरी तरह सुरक्षित माहौल तैयार किया जा सके।
बस्तर की नई पहचान
जो बस्तर कभी नक्सल हिंसा के लिए जाना जाता था, अब वह अपनी शांति, संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता के लिए पहचाना जाएगा, नक्सलवाद उन्मूलन पर 30 मार्च को लोकसभा में महत्वपूर्ण चर्चा होगी, जिसकी शुरुआत सांसद श्रीकांत शिंदे करेंगे।

