CG News: सीएम साय के सुशासन में हाथों में हथियार नहीं, अब कलम की ताकत
CG News: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के ‘शिक्षित छत्तीसगढ़-विकसित छत्तीसगढ़’ के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए बस्तर जिले में ‘उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत महापरीक्षा का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। जिला प्रशासन की इस अनूठी पहल ने वनांचल के कोनों-कोनों में ज्ञान की नई अलख जगा दी है। इस महापर्व में जिले के 25,706 परीक्षार्थियों ने हिस्सा लिया, जो यह दर्शाता है कि साय सरकार के नेतृत्व में अब बस्तर का हर नागरिक स्वावलंबन और सम्मानजनक जीवन की ओर कदम बढ़ा रहा है।
भयमुक्त और शिक्षित बस्तर की परिकल्पना
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का मानना है कि शिक्षा ही वह अस्त्र है जो नक्सलवाद और पिछड़ेपन के अंधकार को मिटा सकता है। उनके दिशा-निर्देशों पर आयोजित इस महापरीक्षा ने महज साक्षरता का आंकड़ा नहीं बढ़ाया, बल्कि उन बुजुर्गों और युवाओं के सपनों को पंख दिए हैं जो किन्हीं कारणों से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी नहीं कर पाए थे। बस्तर के दुर्गम क्षेत्रों में 812 परीक्षा केंद्र स्थापित करना शासन की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जहाँ विकास की किरण अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँच रही है। मुख्यमंत्री की ‘सुशासन’ नीति का ही परिणाम है कि आज बस्तर के जंगलों में गोलियों की गूँज की जगह किताबों के पन्नों की सरसराहट सुनाई दे रही है।

जब बंदूक की जगह हाथों में आई कलम
जगदलपुर के केंद्रीय कारागार और आड़ावाल स्थित पुनर्वास केंद्र से इस महापरीक्षा की एक बेहद प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। यह दृश्य मुख्यमंत्री साय की ‘पुनर्वास और शांति’ आधारित नीति के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है। जो युवा कभी भटके हुए रास्तों पर चल पड़े थे और हथियार उठाने को मजबूर थे, आज वही आत्मविश्वास के साथ कलम थामकर एक नई शुरुआत कर रहे हैं।

पुनर्वास केंद्र के 28 युवाओं और जेल में बंद 141 कैदियों ने परीक्षा में शामिल होकर यह साबित किया है कि वे समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनका यह कदम न केवल व्यक्तिगत बदलाव का संकेत है, बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र में आ रहे व्यापक परिवर्तन को भी दर्शाता है। अब बस्तर में डर और असुरक्षा की जगह विश्वास और स्थायी शांति का माहौल बनता नजर आ रहा है, जो इस बदलाव की सबसे बड़ी पहचान बन चुका है।
सुदूर वनांचलों तक सुलभ हुई परीक्षा
मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन ने परीक्षा के आयोजन में कोई कसर नहीं छोड़ी। संयुक्त संचालक श्री एचआर सोम और जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने केंद्रों का सघन निरीक्षण किया। पढ़ने, लिखने और बुनियादी अंकगणित की क्षमता को परखने वाली इस मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया। दुर्गम क्षेत्रों में परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता ने यह सुनिश्चित किया कि घने जंगलों के बीच रहने वाले आदिवासी भाई-बहन भी इस ज्ञान यज्ञ का हिस्सा बन सकें। अधिकारियों की सक्रियता और मुख्यमंत्री की निरंतर मॉनिटरिंग ने इस आयोजन को एक जन-आंदोलन में बदल दिया है।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
‘उल्लास’ कार्यक्रम के माध्यम से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बस्तर के लोगों को केवल अक्षर ज्ञान नहीं दिया, बल्कि उन्हें डिजिटल और वित्तीय साक्षरता की ओर भी प्रेरित किया है। जब एक ग्रामीण साक्षर होता है, तो वह सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे प्राप्त करने में सक्षम होता है और बिचौलियों के चंगुल से मुक्त होता है। यह महापरीक्षा बस्तर की उस नई पीढ़ी और जागरूक समाज की नींव है, जो आने वाले समय में प्रदेश की जीडीपी और विकास में अपना सक्रिय योगदान देगी।
नया बस्तर शिक्षा, शांति और सुशासन का संगम
बस्तर की माटी अब केवल संघर्ष के लिए नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभा के लिए जानी जाएगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की दूरगामी सोच ने बस्तर के युवाओं को यह विश्वास दिलाया है कि सरकार उनके साथ खड़ी है। 25 हजार से अधिक लोगों का एक साथ परीक्षा में बैठना यह साबित करता है कि बस्तर की जनता विकास चाहती है। शिक्षा का यह ‘उल्लास’ आने वाले समय में बस्तर को देश के सबसे विकसित और साक्षर जिलों की श्रेणी में खड़ा करेगा। ग्रामीणों ने भी मुख्यमंत्री के इस ‘साक्षरता महाअभियान’ की सराहना करते हुए इसे अपने जीवन का नया सवेरा बताया है।



