Jashpur News: सीएम साय के नेतृत्व में जशपुर में महिलाओं की आत्मनिर्भरता की नई कहानी
Jashpur News: जशपुर जिले की संजीता एक्का ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर मत्स्य, बत्तख और सुकर पालन अपनाते हुए आय के कई नए स्रोत विकसित किए हैं। उनकी नवाचारी सोच न केवल उनके परिवार को खुशहाली दे रही है बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
परंपरागत खेती से नवाचार की ओर कदम
संजीता एक्का, ग्राम सोगड़ा की एक प्रगतिशील महिला किसान हैं, जिन्होंने खेती के पारंपरिक तरीकों को बदलने का साहस दिखाया। पहले वे अपने पति ईश्वर राम एक्का के साथ केवल धान की खेती करती थीं, जिससे सीमित आय होती थी। लेकिन बदलते समय के साथ उन्होंने नई तकनीकों और विकल्पों को अपनाने का निर्णय लिया। यह निर्णय उनके जीवन में आर्थिक सुधार का आधार बना। अब वे खेती को केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक व्यवसाय के रूप में देखती हैं।

बहुआयामी कृषि से बढ़ी आमदनी
संजीता ने मत्स्य पालन, बत्तख पालन और सुकर पालन को अपनाकर अपनी आय के कई स्रोत तैयार किए हैं। मछली पालन से उन्हें धान की तुलना में अधिक लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही बत्तख और सुअर पालन से भी नियमित आय प्राप्त हो रही है। इस विविधीकृत कृषि प्रणाली ने उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है। अब उनका परिवार पहले की तुलना में अधिक स्थिर और खुशहाल जीवन जी रहा है।
फसल विविधीकरण और बागवानी की पहल
संजीता अब केवल खरीफ में धान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रबी और ग्रीष्म ऋतु में आलू और गेहूं की खेती भी कर रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने लीची के पौधे लगाकर बागवानी की शुरुआत की है। लीची के पौधे न केवल भविष्य की आय का स्रोत बनेंगे बल्कि मिट्टी के कटाव को भी रोकने में सहायक हैं। इस तरह उन्होंने अपने खेत का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया है। उनकी यह पहल टिकाऊ कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
शासन की योजनाओं से मिला संबल
संजीता एक्का ने शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी कृषि गतिविधियों को विस्तार दिया है। उन्होंने अपने खेत के आसपास सोलर फेंसिंग भी लगवाई है, जिससे फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। सरकारी सहयोग ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। यह उदाहरण दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन और योजनाओं से किसान सशक्त बन सकते हैं।
अन्य किसानों के लिए प्रेरणा और संदेश
संजीता एक्का अब अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर नई फसलों और तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका मानना है कि नवाचार ही खेती को लाभकारी बना सकता है। वे किसानों को धान के साथ-साथ अन्य फसलों और पशुपालन अपनाने की सलाह देती हैं। कृषि में बदलाव ही आर्थिक समृद्धि की कुंजी है। उनकी सफलता कई ग्रामीण परिवारों के लिए आशा की नई किरण है।
कृषि क्रांति एक्सपो में सीखने का अवसर
जिले के किसान यदि आधुनिक और नवाचारी खेती सीखना चाहते हैं, तो 23 से 25 मार्च तक कृषि महाविद्यालय कुनकुरी में आयोजित कृषि क्रांति एक्सपो में भाग ले सकते हैं। यह आयोजन किसानों को नई तकनीकों और उन्नत कृषि पद्धतियों से परिचित कराएगा। ऐसे मंच किसानों को आगे बढ़ने का अवसर देते हैं। संजीता की तरह अन्य किसान भी इससे प्रेरणा लेकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं।



