Jagannath Puri: भारत में ऐतिहासिक रहस्यों और चमत्कारों से भरे कई प्रसिद्ध मंदिर और धार्मिक स्थान देखने को मिलते हैं। इसी कड़ी में उड़ीसा का जगन्नाथ पुरी मंदिर (Jagannath Puri Temple) देश के चार धामों (बद्रीनाथ, द्वारिका, रामेश्वरम और पुरी) में से एक है, जो कई रहस्यों से घिरा हुआ है। जगन्नाथ मंदिर का इतिहास अपने आप में आश्चर्यजनक है। ऐसा माना जाता है कि आज भी भगवान कृष्ण का दिल जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Puri) में मौजूद मूर्ति के अंदर धड़कता है। तो आइए जानते हैं जगन्नाथ मंदिर में श्रीकृष्ण के धड़कते दिल का रहस्य।
क्या है इस मंदिर की पौराणिक कथा
मत्स्य पुराण में जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Puri) के रहस्य का विस्तार से उल्लेख देखने को मिलता है। मंदिर में भगवान श्री कृष्णा अपने भाई बहन के साथ विराजमान हैं। भगवान विष्णु जब चारों धामों पर बसे, तो सबसे पहले वह बद्रीनाथ पहुंचे, जहां कुंड में उन्होंने स्नान किया। इसके बाद वह गुजरात के द्वारका पहुंचे और वहां उन्होंने अपने कपड़े बदले और फिर वह उड़ीसा की पूरी पहुंचे जहां उन्होंने भोजन किया। आखिर में तमिलनाडु के रामेश्वरम पहुंचकर उन्होंने आराम किया। हिंदू धर्म में स्वर्ग समान जगन्नाथ पुरी का एक अपना ही महत्व है। आपको को बता दें कि जगन्नाथ मंदिर में अनेक रहस्य छुपे हुए हैं। ऐसी मान्यता है की भगवान विष्णु स्वयं भोजन करने जगन्नाथ पुरी (Jagannath Puri) आते हैं। वहां का प्रसाद कभी खत्म नहीं होता। लाखों की तादात में रोज श्रद्धालु जगन्नाथ पुरी भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं ।
आज भी धड़कता है भगवान कृष्ण का दिल
भगवान विष्णु ने जब कृष्ण अवतार में अपने शरीर का त्याग किया था उसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया था। तब शरीर के एक हिस्से को छोड़कर उनका सारा शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। अंतिम संस्कार के बाद भी उनका दिल धड़क रहा था जो आज भी भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा के अंदर सुरक्षित है।
जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Puri) के गर्भगृह में स्थित भगवान जगन्नाथ की मूर्ति हर 12 वर्षों के बाद बदली जाती है। जब मंदिर की मूर्ति बदली जाती है, तो पुरानी मूर्ति में से ब्रह्म पदार्थ निकालकर नई मूर्ति में डाल दिया जाता है। ब्रह्म पदार्थ को ही श्री कृष्ण का हृदय माना जाता है। मूर्ति बदलने वाले पुजारियों का कहना है कि जब वह ब्रह्म पदार्थ का स्थानांतरण करते हैं तब उन्हें वह उछलता हुआ महसूस होता है। ऐसी मान्यता है कि ब्रह्म पदार्थ को देखने वाला व्यक्ति उसे क्षण अंधा हो सकता है या उसकी मृत्यु हो सकती है। इसीलिए ब्राह्म पदार्थ के स्थानांतरण के समय पुजारी की आंखों पर रेशमी पट्टी बांध दी जाती है ,जिससे वह ब्रह्म पदार्थ देख नहीं सकते।
क्या है मंदिर के अनोखे रहस्य
• जगन्नाथ मंदिर में चार द्वारा है। लेकिन प्रवेश के लिए मुख्य द्वार का उपयोग किया जाता है जिसे सिंहद्वार भी कहा जाता है।
•जगन्नाथ मंदिर समुद्र किनारे स्थित है, सिंहद्वार पर समुद्र के लहरों की तेज आवाज सुनाई देती है लेकिन मंदिर में प्रवेश करते हैं वह आवाज शांत हो जाती है, यह क्यों होता है किसी को नहीं पता।
• जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Puri) पर सूर्य का प्रकाश पड़ने के बावजूद उसकी कोई परछाई जमीन पर देखने को नहीं मिलती है।
• मंदिर के ऊपर से हवाई वाहन तो क्या पक्षियों का गुजरना भी वर्जित है।
• आपको बता दें की जगन्नाथ मंदिर के शीर्ष पर स्थित चक्र जिसे नील चक्र के नाम से जाना जाता है। वह सभी दिशाओं से एक समान दिखाई पड़ता है , शीर्ष पर स्थित झंडा जिसे हर शाम पुजारी के द्वारा बदला जाता है ऐसी मान्यता है कि अगर किसी दिन वह झंडा नहीं बदल गया तो अगले 18 वर्षों के लिए मंदिर को बंद करना पड़ेगा।
•जगन्नाथ मंदिर में बनाए जाने वाला प्रसाद अनोखी तरीके से बनाया जाता है जिससे लाखों भक्तों में प्रतिदिन वितरित किया जाता है।




