CG News: छत्तीसगढ़ में वन्य जीवन और इको-टूरिज्म का विकास, राज्य में वन क्षेत्र और वन्य जीवन में वृद्धि
CG News: छत्तीसगढ़ में पिछले दो सालों में वन क्षेत्र के विस्तार के साथ वन्य जीवन में भी सुधार हुआ है, राज्य का लगभग 44% भौगोलिक क्षेत्र अब वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है, सघन वनों का क्षेत्र 348 वर्ग किलोमीटर हो गया है, इससे वन्य प्राणियों की संख्या में वृद्धि हुई है, 2022 में प्रदेश में बाघों की संख्या 17 थी, जो अब बढ़कर 35 हो गई है, बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए अन्य टाइगर रिजर्व से स्थानांतरण की अनुमति भी मिली है, गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व के गठन से बाघों के संरक्षण को मजबूती मिली है.

वन्य प्राणी और पक्षियों का संरक्षण
वनभैंसा संरक्षण:
इन्द्रावती टाइगर रिजर्व में वनभैंसों की संख्या अब 14 से 17 पहुँच गई है,
पहाड़ी मैना संरक्षण:
स्थानीय युवाओं को ‘मैना मित्र’ के रूप में जोड़कर लगभग 600-700 पहाड़ी मैना की संख्या बनी हुई है,
बर्ड इंटरप्रिटेशन सेंटर और बर्ड सफारी:
गिधवा-परसदा में स्थापित इस केंद्र में 270+ पक्षी प्रजातियां देखी जा सकती हैं.
इको-टूरिज्म और रोजगार का संवर्धन
• बिलासपुर का कोपरा जलाशय प्रदेश का पहला और देश का 96वां रामसर स्थल घोषित हुआ,
• राज्य में 240 प्राकृतिक पर्यटन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 50 से अधिक स्वावलंबी बन चुके हैं,
• वनवासियों की सुविधा के लिए 96 रपटा-पुलिया का निर्माण किया गया है,
• मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में एशिया का सबसे बड़ा समुद्रीय जीवाश्म पार्क विकसित किया गया है.
मानव-हाथी द्वंद पर नियंत्रण
हाथी प्रभावित क्षेत्रों में ‘गज संकेत’ ऐप के माध्यम से हाथियों की निगरानी की जा रही है, ग्रामीणों को समय पर सूचना दी जा रही है, प्रदेश में 355 हाथी दर्ज किए गए हैं और 90 हाथी मित्र दल गठित किए गए हैं, इन प्रयासों से हाथी-मानव द्वंद में कमी आई है, छत्तीसगढ़ में वन संरक्षण, वन्य जीवन संवर्धन और इको-टूरिज्म के विकास से न केवल पर्यावरण सुरक्षित हो रहा है, बल्कि ग्रामीण और वनवासियों के लिए रोजगार और स्थायी आजीविका के नए अवसर भी बन रहे हैं.



