CG News: बदलता बस्तर: नक्सल गढ़ से विकास की राह तक, शांति, सुरक्षा और विकास की नई कहानी
CG News: छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग कभी नक्सल हिंसा के कारण देशभर में चर्चा का केंद्र रहा, घने जंगलों और दुर्गम इलाकों में दशकों तक भय और असुरक्षा का माहौल रहा, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है, विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सुरक्षा और विकास को साथ लेकर काम किया, जिसका असर अब जमीन पर दिखने लगा है, धुर नक्सल प्रभावित 29 गांवों में आजादी के बाद पहली बार राष्ट्रीय पर्व पर तिरंगा फहराया गया, यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जीत का प्रतीक है.

आत्मसमर्पण और पुनर्वास की नई नीति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में “सुरक्षा, विकास और विश्वास” की नीति लागू की गई, सुकमा में कई इनामी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जगदलपुर में आयोजित “पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन” कार्यक्रम में 210 नक्सलियों का आत्मसमर्पण ऐतिहासिक कदम माना गया, “नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025” और “नियद नेल्ला नार” योजना ने युवाओं को मुख्यधारा में लौटने का अवसर दिया है, पिछले डेढ़ साल में बड़ी संख्या में नक्सली मारे गए, गिरफ्तार हुए या आत्मसमर्पण कर चुके हैं, सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाना है.

शिक्षा, सड़क और डिजिटल क्रांति
अबूझमाड़ के रेकावाया गांव में पहली बार स्कूल बन रहा है, लगभग 50 बंद स्कूल फिर से खोले गए हैं, बीजापुर के चिलकापल्ली में 77 साल बाद पहली बार बिजली पहुंची, 49 नई सड़कों, 11 पुलों और रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन की स्वीकृति से क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है, 607 मोबाइल टावर और 4G सेवा से डिजिटल पहुंच बढ़ी है.
आर्थिक और सांस्कृतिक मजबूती
तेंदूपत्ता की दर बढ़ाकर 5500 रुपये करने से लाखों परिवारों को लाभ मिला है, नई उद्योग नीति 2024-30 में बस्तर को विशेष प्रोत्साहन दिया गया है, नागरनार स्टील प्लांट और नियानार औद्योगिक क्षेत्र से रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, ‘बस्तर ओलंपिक’ और ‘बस्तर पंडुम’ जैसे आयोजन अब गोलियों की जगह खेल और संस्कृति की पहचान बना रहे हैं.
शांति और प्रगति की नई पहचान
मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश है कि, बस्तर में अब बंदूक नहीं, किताब और तरक्की की आवाज गूंजेगी, बस्तर फाइटर्स में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल रहा है, आज बस्तर शांति, विकास और नई उम्मीद की राह पर आगे बढ़ रहा है, यह बदलाव केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक जागरण की मिसाल बनता जा रहा है.




