CG News: नक्सलवाद से नवविश्वास तक: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ‘बस्तर ओलंपिक’ बना परिवर्तन का प्रतीक
CG News: कभी नक्सलवाद, हिंसा और पिछड़ेपन की छवि से जूझता बस्तर आज खेल, उम्मीद और विकास की नई इबारत लिख रहा है, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आयोजित ‘बस्तर ओलंपिक 2025’ इस ऐतिहासिक परिवर्तन का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है, यह आयोजन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सामाजिक पुनर्जागरण और शांति स्थापना का व्यापक अभियान है.

मैदान में उतरा पूरा बस्तर
बस्तर संभाग के सातों जिलोंबस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर से कुल 3,91,289 खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया, इनमें 1,63,668 पुरुष और 2,27,621 महिला खिलाड़ी शामिल रहीं, महिलाओं की ऐतिहासिक भागीदारी ने यह संदेश दिया कि, बस्तर की बेटियां अब आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं और शासन पर उनका भरोसा मजबूत हुआ है.
खेल बना सामाजिक परिवर्तन का माध्यम
मुख्यमंत्री साय का स्पष्ट मानना है कि, नक्सलवाद का स्थायी समाधान केवल सुरक्षा बलों से नहीं, बल्कि अवसर और विश्वास के जरिए संभव है, गृह (पुलिस) विभाग और खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संयुक्त प्रयास से बस्तर ओलंपिक को आकार दिया गया, छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष में यह आयोजन बस्तर की नई पहचान बन गया है.

परंपरा और आधुनिक खेलों का संगम
एथलेटिक्स, तीरंदाजी, फुटबॉल, हॉकी, कबड्डी, खो-खो, बैडमिंटन, वॉलीबॉल, कराते और वेटलिफ्टिंग जैसे खेलों के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को भी मंच दिया गया, आयोजन में 300 से अधिक आत्मसमर्पित नक्सलियों (नुवा बाट) और 18 से अधिक दिव्यांग खिलाड़ियों की भागीदारी ने इसे पुनर्वास और पुनर्जन्म का प्रतीक बना दिया.
तीन चरणों में पारदर्शी प्रतियोगिता
प्रतियोगिताएं विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर आयोजित की गईं, विजेताओं को नगद पुरस्कार, मेडल, ट्रॉफी और शील्ड प्रदान की गईं, जिनकी राशि DBT के माध्यम से सीधे खातों में भेजी गई, संभागीय विजेताओं को “बस्तर यूथ आइकॉन” के रूप में पहचान मिली, जो युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना.
‘स्पोर्ट्स फॉर पीस’ मॉडल बना राष्ट्रीय उदाहरण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में बस्तर ओलंपिक को विकास और खेल के संगम का उदाहरण बताया, वन भैंसा और पहाड़ी मैना जैसे शुभंकर बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक चेतना के प्रतीक बने, यह आयोजन आज देश में ‘खेल के माध्यम से शांति’ के सफल मॉडल के रूप में देखा जा रहा है.
भविष्य की नींव और नई उम्मीद
समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के पूर्ण अंत का लक्ष्य दोहराया और बस्तर को पर्यटन व उद्योग का केंद्र बनाने की बात कही, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे बस्तर की संस्कृति, उत्साह और प्रतिभा का उत्सव बताते हुए कहा कि, यह बदलाव स्थायी है.



