CG News: बस्तर पंडुम 2026: माँ दंतेश्वरी की धरती पर संस्कृति का भव्य उत्सव, जनजातीय पहचान और सांस्कृतिक गौरव का अद्भुत संगम
CG News: बस्तर पंडुम 2026 ने न केवल जनजातीय संस्कृति को मंच दिया, बल्कि प्रशासन और सरकार की संवेदनशीलता को भी दर्शाया, लाल बाग मैदान में हुए इस आयोजन ने पूरे देश का ध्यान बस्तर की गौरवशाली विरासत की ओर आकर्षित किया.
दूरदर्शिता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सोच और प्रशासन के सहयोग से यह आयोजन उन परंपराओं के संरक्षण का प्रतीक बन गया, जो समय के साथ विलुप्त होने की कगार पर थीं, पारंपरिक नृत्य, लोकगीत, खानपान और शिल्प सब कुछ अपने मूल स्वरूप में जीवित रखा गया.

सुकमा: सांस्कृतिक प्रतिभा का प्रतीक
सुकमा जिले के कलाकारों ने बस्तर की आत्मा को मंच पर जीवंत किया, छिंदगढ़ विकासखंड के किंदरवाड़ा निवासी गुंजन नाग और किरण नाग ने जनजातीय वेशभूषा प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर जिले और पूरे बस्तर का मान बढ़ाया.
सरकार का सम्मान और प्रोत्साहन
गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा कलाकारों को स्मृति चिन्ह और 50,000 रुपये का प्रोत्साहन चेक प्रदान किया गया, यह सम्मान प्रशासन की कलाकारों और सांस्कृतिक विरासत के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
सहभागिता और नई उड़ान
सुकमा जिले के 69 कलाकारों ने 12 विभिन्न विधाओं में भाग लेकर यह साबित किया कि, प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए मंच और अवसर जनजातीय प्रतिभाओं को नई उड़ान दे रहे हैं, यह सहभागिता केवल प्रस्तुति नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और भविष्य की उम्मीद का प्रतीक रही.
विकास और संस्कृति का संतुलन
बस्तर पंडुम 2026 यह संदेश देता है कि, विकास केवल भौतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्य भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, प्रशासन और नेतृत्व के सहयोग से परंपरा और विकास एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं.




