CG News: बस्तर पण्डुम 2026: कला, संस्कृति और परंपरा का उत्सव, जनजातीय संस्कृति का महोत्सव
CG News: बस्तर पण्डुम छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र का प्रमुख सांस्कृतिक, सामुदायिक और प्राकृतिक उत्सव है, यह कार्यक्रम जनजातीय परंपराओं, लोक कलाओं और जीवन शैली को संरक्षित और प्रदर्शित करने का अनोखा मंच है, उत्सव में पारंपरिक नृत्य, संगीत (मांदर-बांसुरी), वेशभूषा, लोक शिल्प (काष्ठ, बांस, धातु) और पारंपरिक खान-पान का प्रदर्शन किया जाएगा, यह आयोजन स्थानीय कलाकारों और युवाओं को उनकी जड़ों से जोड़ने का अवसर भी प्रदान करता है.

इस वर्ष की भागीदारी तीन गुना
2026 में बस्तर पण्डुम ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, विकासखंड स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में 15,596 प्रतिभागियों के मुकाबले इस बार भागीदारी तीन गुना बढ़कर 54,745 हो गई है, दन्तेवाड़ा जिले ने 24,267 पंजीयन के साथ सबसे अधिक प्रतिभागियों का योगदान दिया, जबकि कांकेर, बीजापुर और सुकमा जिलों ने भी हजारों की संख्या में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई.
संभाग स्तरीय आयोजन और मुख्य आकर्षण
संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम 07 से 09 फरवरी 2026 तक आयोजित होगा, जिला स्तर की प्रतियोगिता से चयनित 84 दल और 705 कलाकार इस दौरान अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे, तीन दिनों में मुख्य आकर्षण जनजातीय नृत्य की थाप, पारंपरिक गीत और नाटकों का मंचन होगा, कुल 12 विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें 192 कलाकार जनजातीय नृत्य और 134 कलाकार जनजातीय नाटक में हिस्सा लेंगे.

संगीत, व्यंजन और हस्तशिल्प का प्रदर्शन
इस आयोजन में 65 कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन प्रस्तुत करेंगे, 56 प्रतिभागी जनजातीय व्यंजनों की खुशबू फैलाएंगे, इसके अतिरिक्त, बस्तर की दुर्लभ वन औषधियां, चित्रकला, शिल्प कला, आभूषण और आंचलिक साहित्य का प्रदर्शन भी किया जाएगा, यह उत्सव केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि ज्ञान, कला और स्वाद का अनोखा संगम है.
मातृशक्ति की बढ़ती भागीदारी
संभाग स्तर पर पहुंचने वाले 705 प्रतिभागियों में 340 महिलाएं और 365 पुरुष शामिल हैं, यह भागीदारी दर्शाती है कि, बस्तर की महिलाएं संस्कृति को आगे बढ़ाने और संरक्षित करने में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं.
बस्तर पण्डुम 2026: अविस्मरणीय उत्सव
बस्तर पण्डुम 2026 अपनी भव्यता, विशाल जन-भागीदारी और समृद्ध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ एक अविस्मरणीय आयोजन बनने की ओर अग्रसर है, यह उत्सव न केवल बस्तर की संस्कृति को संरक्षित करता है, बल्कि युवाओं और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने में भी सफल हो रहा है.



