CG News: तेंदूपत्ता उद्योग को बड़ी राहत, केंद्र सरकार ने टीसीएस 5% से घटाकर 2% किया
CG News: केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत आम बजट में तेंदूपत्ता उद्योग से जुड़े लाखों लोगों के हित में एक बड़ा और राहतपूर्ण निर्णय लिया गया है, तेंदूपत्ता व्यापार पर लगने वाली टीसीएस (Tax Collected at Source) की दर को 5 प्रतिशत से घटाकर केवल 2 प्रतिशत कर दिया गया है, इस फैसले से वन आधारित आजीविका पर निर्भर समुदायों को सीधा लाभ मिलेगा.
संग्राहकों और छोटे व्यापारियों को सीधा फायदा
इस निर्णय को लेकर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि, टीसीएस दर घटने से तेंदूपत्ता संग्राहकों, प्राथमिक सहकारी समितियों, लघु व्यापारियों और वन उत्पादों पर निर्भर परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, कम कटौती से अब उनके हाथ में अधिक नकद राशि बचेगी, जिससे उनकी कार्यशील पूंजी बढ़ेगी.

आदिवासी और वनवासी परिवारों को राहत
वनमंत्री कश्यप ने कहा कि, तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े आदिवासी और वनवासी परिवारों को अब कम कर कटौती का सामना करना पड़ेगा, इससे उन्हें उनके श्रम का पूरा मूल्य मिल सकेगा, यह फैसला सीधे तौर पर ग्रामीण और आदिवासी अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगा.
छोटे व्यापारियों की बड़ी समस्या का समाधान
पहले 5 प्रतिशत टीसीएस छोटे व्यापारियों के लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ था, कई संग्राहक और व्यापारी आयकर दायरे में नहीं आते थे, लेकिन टीसीएस कटने के बाद रिफंड की प्रक्रिया जटिल और समयसाध्य हो जाती थी, अब दर घटने से यह समस्या काफी हद तक समाप्त होगी और व्यापार करना आसान होगा.
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वन आधारित अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
टीसीएस में कटौती से तेंदूपत्ता जैसे वन उत्पादों के व्यापार को प्रोत्साहन मिलेगा, इससे वन आधारित उद्योगों में नई ऊर्जा आएगी और ग्रामीण-आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार व आय के अवसर बढ़ेंगे.
प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के प्रति आभार
वनमंत्री केदार कश्यप ने इस जनहितकारी फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के प्रति आभार व्यक्त किया, उन्होंने कहा कि, यह निर्णय दर्शाता है कि, केंद्र सरकार वनवासी, आदिवासी और श्रम आधारित समुदायों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए संवेदनशील और प्रतिबद्ध है.
समावेशी और मानवीय बजट का उदाहरण
उन्होंने कहा कि, यह फैसला एक समावेशी और मानवीय बजट का उदाहरण है, यह साबित करता है कि, सरकार की सोच केवल राजस्व बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि गरीब, आदिवासी, श्रमिक और वन आश्रित परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में केंद्रित है.




