CG News: कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की झांकी ने बटोरी तालियां, जनजातीय वीरों की विरासत का किया भव्य प्रदर्शन
CG News: 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर प्रस्तुत छत्तीसगढ़ की झांकी ने देश-दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया, “स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्” थीम पर आधारित इस झांकी ने जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों की गौरवगाथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया.
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने की सराहना
झांकी को देखने के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने तालियां बजाकर छत्तीसगढ़ की प्रस्तुति की सराहना की, दर्शक दीर्घा में मौजूद लाखों लोगों ने भी झांकी का उत्साहपूर्वक स्वागत किया.

लोक नृत्य ने बढ़ाया झांकी का आकर्षण
झांकी के समक्ष छत्तीसगढ़ के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक लोक नृत्य ने पूरे माहौल को जीवंत बना दिया, नृत्य के माध्यम से जनजातीय संस्कृति, परंपरा और वीरता की भावना को प्रभावी रूप से दर्शाया गया.
देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की झलक
झांकी में नवा रायपुर अटल नगर में स्थापित देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की भव्य झलक दिखाई गई, इस संग्रहालय में छत्तीसगढ़ सहित देश के 14 प्रमुख जनजातीय स्वतंत्रता आंदोलनों को आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से संरक्षित किया गया है.

प्रधानमंत्री ने किया था संग्रहालय का उद्घाटन
इस ऐतिहासिक जनजातीय डिजिटल संग्रहालय का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य गठन की रजत जयंती के अवसर पर किया था, यह संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों को जनजातीय नायकों के संघर्ष और बलिदान से परिचित कराता है.
भूमकाल विद्रोह के नायक वीर गुंडाधुर की गाथा
झांकी के अग्र भाग में 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह के नायक वीर गुंडाधुर को विशेष रूप से दर्शाया गया, धुर्वा समाज के इस महान योद्धा ने अंग्रेजी शासन के अन्याय के खिलाफ जनजातीय समाज को संगठित किया.
विद्रोह के प्रतीक बने आम की टहनी और सूखी मिर्च
भूमकाल विद्रोह के प्रतीक के रूप में झांकी में आम की टहनियां और सूखी मिर्च प्रदर्शित की गईं, इस विद्रोह की तीव्रता इतनी थी कि, अंग्रेजों को नागपुर से सेना बुलानी पड़ी, फिर भी वे वीर गुंडाधुर को पकड़ नहीं सके.
छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह का शौर्य
झांकी के पृष्ठ भाग में छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह को घोड़े पर सवार, हाथ में तलवार लिए दिखाया गया, उन्होंने अकाल के समय गरीबों के अधिकारों की रक्षा की और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
जनजातीय साहस और बलिदान का जीवंत चित्रण
पूरी झांकी जनजातीय समाज के अदम्य साहस, बलिदान और देशभक्ति की भावना को सशक्त रूप से प्रस्तुत करती नजर आई, कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की यह प्रस्तुति गणतंत्र दिवस परेड में राज्य की गौरवपूर्ण पहचान को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित करती दिखी.




