CG News: दंतेवाड़ा अब छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र का चमकता सितारा, बस्तर का नया पर्यटन आकर्षण केंद्र
CG News: कभी घने जंगलों और जनजातीय संस्कृति के लिए जाना जाने वाला दंतेवाड़ा अब पर्यटन की नई पहचान बन गया है, बारसूर और मुचनार जैसे ऐतिहासिक स्थल अब रोमांच, प्रकृति और आध्यात्मिकता का संगम पेश कर रहे हैं, बारसूर 10वीं–11वीं शताब्दी में दक्षिण कोसल क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र था, नागर शैली में निर्मित शिव, विष्णु और गणेश मंदिर बस्तर की प्राचीन स्थापत्य कला और आध्यात्मिक परंपरा की गवाही देते हैं.

प्राकृतिक सौंदर्य और सातधार नदी
सातधार नदी के किनारे फैली हरियाली और कल-कल बहता जल बस्तर की आत्मा को दर्शाता है, यह स्थान फोटोग्राफी, ध्यान और पिकनिक के लिए आदर्श है, प्राचीन काल में साधु-संत यहाँ तपस्या किया करते थे और आज यह प्राकृतिक आश्रम सैलानियों को शांति का अनुभव देता है.
धार्मिक आस्था और रामायण का जुड़ाव
छत्तीसगढ़ को भगवान राम का ननिहाल माना जाता है, मान्यता है कि, वनवास के दौरान प्रभु राम ने दंडकारण्य क्षेत्र में समय बिताया था, दंतेवाड़ा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व इसी आस्था से जुड़ा है, जो पर्यटन के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँच रहा है.
‘अतुल्य दंतेवाड़ा’ अभियान और सुविधाएँ
दंतेवाड़ा जिला प्रशासन ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सड़क, पार्किंग, शौचालय, होमस्टे और सुरक्षा सुविधाओं का विस्तार किया है, स्थानीय युवाओं को गाइड, कैंप ऑपरेटर और पर्यटन सेवाओं से जोड़कर रोजगार के नए अवसर दिए जा रहे हैं, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त निगरानी से पर्यटक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं.
भविष्य की योजना और पर्यटन विस्तार
आने वाले समय में ट्रेकिंग, बोटिंग और सांस्कृतिक टूर जैसे नए विकल्प जोड़ने की योजना है, बारसूर–मुचनार अब केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के इतिहास, प्रकृति और संस्कृति को जोड़ने वाली जीवंत कहानी बन गया है, दंतेवाड़ा यह साबित कर रहा है कि, बस्तर केवल अतीत की पहचान नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के पर्यटन भविष्य की मजबूत नींव है.



