CG News: PMFME योजना से बदली किस्मत, लघुवनोपज से आत्मनिर्भर बने प्रदीप
CG News: प्रदीप देशपांडे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, PMFME योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया और नए सपनों को पंख दिए, राजनांदगांव के वैशाली नगर निवासी प्रदीप कुमार रामराव देशपांडे ने यह साबित कर दिखाया है कि, सरकारी योजनाएं सही हाथों में पहुंचें तो आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार हो सकता है.

छोटे उद्यमियों के लिए बड़ा सहारा
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म खाद्य उद्योगों को औपचारिक स्वरूप देना, रोजगार बढ़ाना और स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ना है, इस योजना के अंतर्गत 35 प्रतिशत तक सब्सिडी (अधिकतम 10 लाख रुपये), प्रशिक्षण, ब्रांडिंग और मार्केटिंग सहायता प्रदान की जाती है.
लघुवनोपज आधारित उद्योग से मिली मजबूती
प्रदेश में उपलब्ध चिरौंजी, हर्रा और बहेरा जैसे लघुवनोपज की संभावनाओं को पहचानते हुए उन्होंने प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की, इस परियोजना के लिए कुल 5.50 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, जिसमें से 2.13 लाख रुपये का अनुदान PMFME योजना के तहत मिला, PMFME योजना के सहयोग से प्रदीप देशपांडे ने अपना स्वयं का खाद्य प्रसंस्करण उद्योग प्रारंभ किया, इस योजना से उन्हें न केवल आर्थिक सहायता मिली, बल्कि उद्योग संचालन के लिए तकनीकी मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ.

महिला स्वसहायता समूह को मिला रोजगार
उद्योग की स्थापना से संस्कारधानी महिला कृषक अभिरुचि स्वसहायता समूह की महिलाओं को स्थायी रोजगार मिला, इससे महिलाओं की आय में वृद्धि हुई और वे आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ीं, यह पहल न केवल रोजगार सृजन का माध्यम बनी है, बल्कि लघुवनोपज संग्रहण, पौध संरक्षण और सतत आजीविका के प्रति जागरूकता भी बढ़ा रही है.
आधुनिक मशीनों से बढ़ा मूल्य संवर्धन
PMFME से प्राप्त सहायता से आईटीआई मुंबई निर्मित चिरौंजी डिकॉल्डीकेटर मशीन खरीदी गई,
इससे,
• चिरौंजी की गिरी अलग की जाती है,
• छिलकों से चारकोल तैयार होता है,
• हर्रा-बहेरा से तेल निष्कर्षण एवं छाल पृथक्करण किया जा रहा है.
सोलर ऊर्जा से चल रही प्रोसेसिंग यूनिट
ग्रामीण क्षेत्र में बिजली की समस्या को देखते हुए यूनिट को सोलर प्लांट से संचालित किया गया है, इससे बिजली खर्च शून्य हो गया और उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी आई है, आज प्रदीप देशपांडे का व्यवसाय छत्तीसगढ़ के साथ-साथ महाराष्ट्र, झारखंड और ओडिशा तक फैल चुका है, इससे उन्हें सालाना लगभग 4 लाख रुपये की आय हो रही है.




