CG News: बस्तर संभाग में 21 फीसदी तक निवेश की संभावना, 43 हजार से ज्यादा लोगों को मिला रोजगार
CG News: छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास को लेकर बड़ी तस्वीर सामने आई है, उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने नवा रायपुर में आयोजित पत्रकारवार्ता में बताया कि, नवंबर 2024 से अब तक राज्य को 7.83 लाख करोड़ रुपये के 219 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनके माध्यम से अब तक 43 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिल चुका है.
18 क्षेत्रों में मिले निवेश प्रस्ताव
मंत्री देवांगन ने कहा कि, छत्तीसगढ़ अब केवल निवेश आकर्षित करने वाला राज्य नहीं रहा, बल्कि प्रस्तावित निवेशों को तेजी से जमीन पर उतारने में भी सफल हो रहा है, राज्य को सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सीमेंट, बिजली, मैन्युफैक्चरिंग समेत 18 अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश प्रस्ताव मिले हैं.

आदिवासी बाहुल्य बस्तर संभाग में 21% निवेश
उद्योग मंत्री ने बताया कि, अब निवेश केवल राजधानी रायपुर तक सीमित नहीं है, कुल निवेश का लगभग 21 प्रतिशत आदिवासी बाहुल्य बस्तर संभाग में प्रस्तावित है, वहीं 33 प्रतिशत निवेश रायपुर संभाग में और 46 प्रतिशत निवेश बिलासपुर, दुर्ग एवं सरगुजा संभागों में होने की संभावना है.
बड़ी परियोजनाओं से बढ़ रहा रोजगार
कुल निवेश प्रस्तावों में 57 परियोजनाएं ऐसी हैं, जिनका निवेश मूल्य 1,000 करोड़ रुपये से अधिक है, वहीं 34 परियोजनाएं 1,000 से अधिक रोजगार देने वाली हैं, वर्तमान में 6,063 करोड़ रुपये की 9 बड़ी परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं, जिनसे उत्पादन प्रारंभ हो गया है और 5,500 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है.
प्राथमिक क्षेत्रों में 58% परियोजनाएं
मंत्री देवांगन ने बताया कि, 58 प्रतिशत परियोजनाएं आतिथ्य एवं स्वास्थ्य, फूड प्रोसेसिंग, आईटी, इलेक्ट्रिकल-इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल और फार्मा जैसे प्राथमिक क्षेत्रों से जुड़ी हैं, इन क्षेत्रों में निवेश से स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है.
सुधारों से बढ़ा निवेशकों का भरोसा
उद्योग मंत्री ने कहा कि, नीतिगत सुधारों के चलते विवेकाधिकार की जगह पारदर्शिता आई है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार ने बताया कि, सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि, निवेश प्रस्ताव के बाद निवेशकों की गति न रुके.
तेज प्रक्रिया से जमीन से उत्पादन तक पहुंच
सचिव रजत कुमार ने कहा कि, तेज भूमि आवंटन, डिजिटल स्वीकृतियां और बेहतर विभागीय समन्वय के कारण कंपनियां बिना देरी के निवेश के इरादे से निर्माण और उत्पादन तक पहुंच पा रही हैं.




