CG News: राज्य की पहली उत्कृष्ट बैंक सखी खेमेश्वरी, सालाना 2 करोड़ रुपये ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड
CG News: गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत धुरुवागुड़ी गांव की खेमेश्वरी तिवारी ने मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के बल पर एक नया इतिहास रच दिया है, राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद बैंकिंग संवाददाता केंद्र (बीसी सेंटर) का संचालन कर रहीं खेमेश्वरी प्रदेश की सबसे अधिक ट्रांजेक्शन करने वाली बैंक सखी बन गई हैं.
संघर्ष से सफलता तक की कहानी
अमलीपदर क्लस्टर की पीआरपी निधि साहू ने बताया कि, खेमेश्वरी को वर्ष 2019 में आजीविका मिशन से जोड़ा गया था, प्रारंभिक प्रशिक्षण के बाद उन्हें बीसी सेंटर की आईडी और आजीविका मिशन से 60 हजार रुपये का ऋण प्रदान किया गया, शुरुआती दो वर्षों में अपेक्षित परिणाम नहीं मिले, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और निरंतर प्रयास जारी रखा.
सालाना 2 करोड़ रूपए से अधिक का ट्रांजेक्शन
बीते दो वित्तीय वर्षों में खेमेश्वरी ने प्रति वर्ष लगभग 2 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन कर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है, वर्ष 2024 में 1.80 करोड़ और वर्ष 2025 में 2 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन कर उन्होंने प्रदेश की उत्कृष्ट बीसी सखी का खिताब भी प्राप्त किया.
1200 हितग्राहियों तक हर माह बैंकिंग सेवा
खेमेश्वरी तिवारी ने बताया कि, वे प्रतिमाह अधिकतम 1200 हितग्राहियों को 20 से 25 लाख रुपये का भुगतान करती हैं, वृद्धा पेंशन, किसान समृद्धि योजना, जीवन ज्योति, तेंदूपत्ता संग्राहक भुगतान, छात्रवृत्ति सहित 12 से अधिक सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को माइक्रो एटीएम के माध्यम से आधार कार्ड और फिंगरप्रिंट स्कैन द्वारा भुगतान किया जाता है, इससे उनकी मासिक आय लगभग 20 हजार रुपये तक हो जाती है.
‘बैंक वाली दीदी’ के नाम से पहचान
कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान जब बैंकिंग सेवाएं सीमित थीं, तब खेमेश्वरी ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के लिए बैंक का विकल्प बनकर उभरीं, यहीं से उन्हें “बैंक वाली दीदी” के नाम से पहचान मिली और धीरे-धीरे बड़ी संख्या में ग्रामीण उनसे जुड़ते चले गए.
आज सैकड़ों लोगों का सहारा बनीं
धुरुवागुड़ी के एक गरीब परिवार में जन्मी खेमेश्वरी का विवाह वर्ष 2017 में हुआ था, दहेज की पूर्ति न कर पाने के कारण उन्हें ससुराल में प्रताड़ना झेलनी पड़ी और अंततः मायके लौटना पड़ा, परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आजीविका मिशन से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया.
दुर्गम गांवों तक पंहुची बैंकिंग सेवा
खेमेश्वरी आज भी 40 से अधिक बुजुर्ग और बीमार हितग्राहियों के घर जाकर भुगतान करती हैं, मैनपुर ब्लॉक के बूढ़गेलटप्पा, खोखमा, सारईपानी और सिहारलीटी पंचायतों के 10 से अधिक जंगलवासी गांवों तक वे नियमित रूप से पहुंचती हैं, ठंड और बरसात में फिंगर स्कैन की दिक्कतों के बावजूद वे कई बार एक ही हितग्राही के घर जाकर सेवा देती हैं.
प्रशासन ने सराहा योगदान
बिहान योजना के जिला अधिकारी ने बताया कि, जिले में 96 बीसी सेंटर हैं, जबकि प्रदेश में इनकी संख्या 3500 से अधिक है, इनमें खेमेश्वरी सर्वाधिक हितग्राहियों को लाभान्वित करने वाली बीसी सखी हैं, जिला पंचायत सीईओ ने बताया कि, खेमेश्वरी को आजीविका मिशन के तहत प्रशिक्षण, ऋण और लैपटॉप उपलब्ध कराया गया है, आने वाले समय में फिंगरप्रिंट समस्या के समाधान के लिए आई-स्कैन डिवाइस भी उपलब्ध कराए जाएंगे.
महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
खेमेश्वरी तिवारी ने इस उपलब्धि के लिए बिहान योजना और आजीविका मिशन के प्रति आभार जताया है, उनका कहना है कि, सही मार्गदर्शन और मेहनत से ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं, आज खेमेश्वरी न केवल अपने परिवार का सहारा हैं, बल्कि जिले और प्रदेश की हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं.



