CG News: राष्ट्रनिर्माण में आदिवासी समाज की अमर भूमिका, सीएम साय का संबोधन
CG News: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गुरूर विकासखंड के राजाराव पठार, ग्राम कर्रेझर में आयोजित विराट वीर मेला महोत्सव के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि, आदिवासी समाज ने सदैव राष्ट्र और समाज की रक्षा में अभूतपूर्व साहस का परिचय दिया है, जब-जब देश पर संकट आया, आदिवासी वीरों ने विघटनकारी ताकतों का डटकर सामना किया, इस मौके पर उन्होंने शहीद वीर नारायण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की.
कर्रेझर में विकास की सौगात
मुख्यमंत्री साय ने ग्राम कर्रेझर में मेला स्थल के पास तालाब निर्माण हेतु 15 लाख रुपए और राजाराव पठार स्थित देवस्थल में किचन शेड निर्माण की घोषणा की और मेला आयोजन के लिए आदिम जाति कल्याण विभाग की 10 लाख की राशि बढ़ाकर 20 लाख रुपए करने की घोषणा भी की, इसके साथ ही मेला स्थल पर 71.93 लाख रुपए के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण भी किया गया.
श्रद्धांजलि सभा में अमर सेनानियों का स्मरण
श्रद्धांजलि सभा में सीएम साय ने भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह, और गैंदसिंह नायक की वीरता को भारत का गौरव बताते हुए उन्हें नमन किया, उन्होंने जोर देकर कहा कि, छत्तीसगढ़ सरकार प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी के सभी वायदों पर कार्य कर रही है.
आदिवासी समाज की गौरवशाली विरासत
मुख्यमंत्री साय ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आदिवासी समाज के संरक्षण और विकास के लिए किए गए योगदानों का उल्लेख किया,
उन्होंने कहा कि, आदिवासी समाज की संस्कृति, इतिहास और विरासत विश्व स्तर पर सम्मान पाने योग्य है.
नक्सल उन्मूलन और विकास के नए आयाम
पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने राज्य और केंद्र सरकार के प्रयासों से नक्सलवाद के तेजी से कमजोर होने की प्रशंसा की, वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि, बस्तर नक्सली हिंसा से मुक्त होकर शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास और वन अधिकार के नए युग में प्रवेश कर रहा है.
लोक कलाकारों की धरोहर जीवंत
कार्यक्रम में आदिवासी कलाकारों ने रेला, मांदरी और हुलकी जैसे पारंपरिक नृत्यों की शानदार प्रस्तुति दी, इन प्रस्तुतियों ने आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को मंच पर जीवंत कर दिया, मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया, पहली ‘आदिशक्ति माँ अंगारमोती’ और दूसरी ‘घोटुल पुंदाना’, यह आदिवासी साहित्य को नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है.



