CG News: जशपुर में आज भी जारी है, नदी की रेत से सोना खोजने की सदियों पुरानी परंपरा
CG News: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में आज भी कई ग्रामीण नदी की रेत से सोना निकालने की पीढ़ियों पुरानी परंपरा से अपनी आजीविका चला रहे हैं, इब और मैनी नदी के किनारों पर सुबह-सुबह ग्रामीण महिलाएं और पुरुष टोकनी व छलनी लेकर रेत छानने पहुंच जाते हैं.
सदियों पुरानी लोकपरंपरा फिर हुई जीवंत
सरगुजा संभाग का जशपुर इलाका अपनी इस अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है, वर्षों से चली आ रही यह प्रक्रिया आज की आधुनिक पीढ़ी भी उसी समर्पण के साथ निभा रही है, कई परिवारों के लिए यह आज भी आय का पहला और प्रमुख साधन है.
“मजदूरी जितनी कमाई हो जाती है”- ग्रामीणों की जुबानी
साढुकछार गांव के निवासी इतवारी बाई और दिनेश राम बताते हैं कि, यह काम उनके पूर्वजों से चला आ रहा है और आज भी इससे रोज़ाना मजदूरी के बराबर या कई बार उससे ज्यादा कमाई हो जाती है, उनके मुताबिक कम मात्रा में मिल रहे सोने के बावजूद उम्मीद कभी खत्म नहीं होती.
सोना कम हो रहा, पर हिम्मत नहीं
तामामुंडा, भालूमुंडा और लवाकेरा गांव के ग्रामीण बताते हैं कि, पहले की तुलना में अब सोने की मात्रा घट गई है, लेकिन रेत से सोना खोजने का काम अभी भी परिवारों की जीविका का आधार है, जो थोड़ा-बहुत सोना निकलता है, उसे वे स्थानीय बाजार में बेच देते हैं.
मेहनत, भरोसा और उम्मीद से मिलता है ‘छिपा खजाना’
नदी किनारे का यह दृश्य ग्रामीणों की मेहनतकश जीवनशैली और उनकी पारंपरिक पहचान का प्रतीक है, रेत में छिपे बारीक स्वर्ण कण इन परिवारों के लिए बड़ा सहारा और उज्जवल भविष्य की उम्मीद बने हुए हैं.



