CG News: पारस शर्मा ने सीजी पीएससी में मिली 5वीं रैंक, डिप्टी कलेक्टर को दी प्राथमिकता
CG News: सीजी पीएससी का रिजल्ट शुक्रवार को जारी कर दिया गया है, 246 पदों के लिए ली गई परीक्षा में जशपुर जिले ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, कुनकुरी के पारस शर्मा ने तीसरे प्रयास में पांचवीं रैंक हासिल कर डिप्टी कलेक्टर के पद को प्राथमिकता दी है.
माता – पिता और भाई की मौत से टूट गए थे पारस
पारस के पिता हीरालाल शर्मा की 2015 में हादसे में मृत्यु हो गई थी और 2016 में मां पूर्णिमा शर्मा का भी निधन हो गया, इसके बाद 2019 में छोटा भाई बोनमैरो की समस्या से पीड़ित हुआ और उसका निधन हो गया, माता-पिता और इकलौते भाई की मौत से पारस बुरी तरह से टूट गए, इसके बाद उनके मित्र हेमचंद पटेल उन्हें अपने साथ बिलासपुर ले गए.
पारस पहले क्रिकेटर बनना चाहते थे
पारस शर्मा बचपन में क्रिकेटर बनना चाहते थे, उन्होंने स्कूल स्तर पर 2003 में अंडर-14 में नेशनल लेवल पर क्रिकेट खेला, लेकिन उन्हें क्रिकेट में कैरियर बनाना कठिन लगा, जिसके बाद उन्होंने पढ़ाई पर ध्यान केन्द्रित किया.
पारस की प्राथमिक पढ़ाई
उनकी प्राथमिक पढ़ाई कुनकुरी शिशु मंदिर में हुई और स्कूली शिक्षा लोयला स्कूल कुनकुरी से पूरी की, इसके बाद भिलाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी से बीई किया, पारस ने खुद को व्यस्त रखने और खालीपन दूर करने के लिए किताबें पढ़नी शुरू की, उन्होंने खुद को पूरी तरह से किताबों में झोंक दिया.
वर्तमान में सामरी में नायब तहसीलदार
पारस पहले प्रयास में प्री के बाद कोविड की चपेट में आ गए, लेकिन फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और अघोर आश्रम में रहकर पढ़ाई की, वे पहले प्रयास में सेल टैक्स इंस्पेक्टर के पद पर चयनित हुए और दूसरे प्रयास में नायब तहसीलदार चुने गए, वर्तमान में पारस सामरी में नायब तहसीलदार हैं.
पिता की अंतिम इच्छा पूरी की
पारस ने बताया कि, उनके पिता चाहते थे कि, वह पढ़-लिखकर अफसर बनें, पिता की मौत के बाद तय किया कि, उनकी इच्छा पूरी करनी है, आस-पास के लोगों को देखकर लगा कि, माध्यम वर्ग के व्यक्ति के लिए पढ़ाई ही आगे बढ़ने का सरल रास्ता है, मेंस में सफलता के लिए आंसर राइटिंग बहुत जरूरी है, नौकरी करते हुए पढ़ना भी चुनौती है, इसलिए वे सुबह जल्दी उठकर पढ़ते थे.
दोस्तों और शिक्षकों ने बढ़ाया हौसला
उन्होंने तैयारी के लिए एनसीआरटी और मानक किताबों को प्राथमिकता दी, उनका कहना है कि, सफलता के लिए कोचिंग की आवश्यकता नहीं है, वे कोचिंग नहीं कर पाए, लेकिन बिलासपुर के कई शिक्षकों ने उनकी तैयारी में सहायता की और दोस्तों ने भी उनके इस सफ़र में उनका हौसला बढ़ाया, दोस्तों ने आंसर राइटिंग और पढ़ाई में सहयोग किया, इसकी बदौलत सफलता मिली, पारस ने बताया कि, वे सवालों के जवाब लिखकर लाइब्रेरी में सीनियर और दोस्तों से चेक करवाते थे.



